प्रक्रिया व सामग्री

वैदिक सनातन संस्कार समिति में प्रत्येक विवाह पवित्र अग्नि के समक्ष वैदिक आर्य पद्धति से, मन्त्रों के उच्चारण तथा अनिवार्य हवन और सप्तपदी के साथ सम्पन्न कराया जाता है।
पूरी विवाह प्रक्रिया लगभग 1.5 से 2 घंटे में सम्पन्न हो जाती है और यह सरल, अनुशासित तथा पारिवारिक वातावरण में की जाती है।

स्वागत एवं बैठने की व्यवस्था

निर्धारित समय पर वर‑वधू अपने परिवार के साथ समिति में पहुँचते हैं, जहाँ उनका स्वागत कर मण्डप व हवन‑कुण्ड के पास सम्मानपूर्वक बैठाया जाता है।

स्वागत विधि और मालाओं का आदान-प्रदान

विवाह एक छोटी प्रार्थना और स्वागत विधि से आरम्भ होता है, इसके बाद वर‑वधू एक‑दूसरे को वरमाला पहनाते हैं; जैमाला द्वारा दोनों सार्वजनिक रूप से एक‑दूसरे को जीवन‑साथी के रूप में स्वीकार करते हैं।

हवन और वैदिक मंत्र

आचार्य जी पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर वेद मन्त्रों के साथ हवन कराते हैं, जिसमें दम्पत्ति के नए जीवन के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।

कन्यादान

कन्यादान की विधि में वधू के माता‑पिता उसकी हथेली वर के हाथ में रखकर आशीर्वाद देते हैं कि दोनों दम्पत्ति धर्म, परस्पर सम्मान और समानता के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करें।

पाणिग्रहण एवं प्रतिज्ञाएँ

पाणिग्रहण में वर वधू का हाथ थामकर आजीवन साथ निभाने, सहयोग और निष्ठा का संकल्प लेते हैं, और आचार्य जी वैदिक वचनों के साथ यह प्रतिज्ञाएँ कराते हैं।

लाजा होमा, फेरे और सप्तपदी

लाजाहोम में अग्नि में खील आदि की आहुति देने के बाद दम्पत्ति पवित्र अग्नि की परिक्रमा (फेरे) लगाते हैं और फिर साथ‑साथ सात प्रतीकात्मक कदम (सप्तपदी) चलते हैं; प्रत्येक कदम जीवन के किसी पक्ष में एक‑दूसरे का साथ निभाने की प्रतिज्ञा है, तथा आर्य पद्धति विवाह में हवन और सप्तपदी दोनों विधियाँ वैध विवाह के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं।

सिन्दूर, मंगलसूत्र और आशीर्वाद

वर वधू की माँग में सिन्दूर भरते हैं और मंगलसूत्र धारण कराते हैं; परिवार के बड़े आशीर्वाद देते हैं और आचार्य जी घोषणा करते हैं कि विवाह वैदिक आर्य पद्धति से सम्पन्न हो गया है।

प्रमाणपत्र एवं निर्देश

संस्कार पूर्ण होने के बाद समिति अभिलेख तैयार कर विवाह प्रमाण‑पत्र प्रदान करती है और आगे शासकीय विवाह रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीयन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देती है।

 विवाह हेतु साथ लाने वाली सामग्री

कृपया समिति के निर्देशानुसार नीचे दी गई सामग्री साथ लेकर आएँ:

  • दो वरमाला तथा कुछ खुले ताज़े फूल।

  • दो नारियल।

  • 250 ग्राम शुद्ध देशी (गाय का) घी।

  • लगभग 250 ग्राम हवन सामग्री (आहुति के लिए मिश्रण)।

  • लगभग 1 किलो समिधा / हवन की लकड़ी।

  • पवित्र अग्नि प्रज्वलित करने हेतु कपूर।

  • मंगलसूत्र, बिछिया (अंगूठियाँ) तथा सिन्दूर की एक डिब्बी।

  • वधू के लिए लाल / पीला / गुलाबी रंग का लगभग 2.5 मीटर कपड़ा या दुपट्टा, जिसे शुभ कार्य में उपयोग किया जाएगा।

  • लाजाहोम के लिए लगभग 100 ग्राम लाई / खील।

  • अपनी सामर्थ्य अनुसार मिठाई व प्रसाद।

(यदि आपके पास पहले से कोई विशेष हवन सामग्री हो तो उसे भी साथ ला सकते हैं।)

समिति क्या प्रदान करती है

समिति द्वारा हवन‑कुण्ड, बैठने की व्यवस्था, आवश्यक पूजन‑बर्तन तथा सम्पूर्ण विधि‑विधान का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे परिवारजन प्रबन्धन की चिंता छोड़कर केवल आशीर्वाद व सहभागिता पर ध्यान दे सकें।

ड्रेस कोड और महत्वपूर्ण निर्देश

  • वर‑वधू का वस्त्र शुद्ध व पारम्परिक हो; समिति के अनुसार वधू के लिए लाल, पीली या गुलाबी रंग की साड़ी / लहंगा रखना शुभ माना जाता है।

  • सभी दस्तावेज़ों व सामग्री के साथ निर्धारित समय से कम‑से‑कम 30–45 मिनट पहले पहुँचें, ताकि जाँच व तैयारी शान्ति से हो सके।

  • समिति परिसर में धूम्रपान, मदिरापान अथवा अनुचित शोर‑शराबा पूर्णतः वर्जित है।